मेदिनीनगर, पलामू। वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और हरित चेतना को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर, गुतुरमा और मैनपाट क्षेत्र में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व वन राखी मूवमेंट के प्रणेता, पर्यावरणविद् एवं विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने किया।
इस दौरान कैंप नंबर-2 एवं कैंप नंबर-3 स्थित बौद्ध मंदिरों में भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पौधा अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही बौद्ध भिक्षुओं और स्थानीय लोगों के बीच विभिन्न प्रजातियों के पौधों का वितरण किया गया। डॉ. जायसवाल ने कहा कि भगवान विष्णु के अवतार भगवान बुद्ध से जुड़े प्रमुख स्थलों—लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर—में भी वन राखी अभियान के माध्यम से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने महामाया मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए बताया कि मंदिर परिसर में उनके द्वारा लगभग 10 वर्ष पूर्व लगाए गए चंपा, पारिजात और कपूर के पौधे आज वृक्ष का रूप ले चुके हैं। उन्होंने कहा, “ऊपर सूर्य देव और नीचे वृक्ष के बिना किसी भी जीव की कल्पना नहीं की जा सकती।”
डॉ. जायसवाल ने लोगों से वनों को भाई-बहन के स्नेह की तरह संरक्षण देने की अपील करते हुए कहा कि प्रकृति का अंधाधुंध दोहन मानवता के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तिब्बत के 11वें पंचेन लामा का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी देश को किसी धर्मगुरु की स्वतंत्रता का हनन करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पंचेन लामा एवं उनके माता-पिता से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि यह विषय तिब्बती समुदाय की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
कार्यक्रम में तिब्बती धर्मगुरु, मंदिर के पुजारी तथा तासी सदोलमा, कलसनमवमु, टीसी बागुन, तेनजिन दोरजी, कातायाना टीसोरी, सुनील, भोला प्रसाद गुप्ता, शिवनारायण पंडित, दिनेश प्रसाद गुप्ता, दीपू प्रसाद जायसवाल, लखन प्रसाद सोनी, गुप्तेश्वर सिंह और सुजीत सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और वनों की रक्षा का संदेश देते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
न्यूज डेस्क। बिंदास पलामू

